
-डॉ सुरेश पाण्डेय-
दुनिया में लगभग दस प्रतिशत ऐसेः लोग ऐसे हैं जो अपने रोजमर्रा के कामकाज में लेफ्ट हैंड यानी बांए हाथ का इस्तेमाल करते हैं। दुनिया की मशहूर लेफ्टी व्यक्तित्वो में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, चार्ली चैपलिन, अल्बर्ट आइंस्टाइन, बराक ओबामा, रतन टाटा, बिल गेट्स, लक्ष्मी मित्तल, मदर टेरेसा, मार्क जुकरबर्ग, स्टीव जॉब्स, रजनीकांत, अमिताभ बच्चन आदि का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। विश्व भर में 13 अगस्त 1992 को लेफ्ट हैंडर्स क्लब द्वारा पहली बार इंटरनेशनल लेफ्ट हैंडेड डे सेलिब्रेट किया गया था। जिसका उद्देश्य था लेफ्ट हैंडर्स के अंदर की इस अनोखी विशेषता को जन मानस से सामने लाकर लोगों को इसके फायदे और नुकसान के बारे में भी जागरूक करना। पहली बार इंटरनेशनल लेफ्ट हैंडेड डे को 1976 में डीन आर केंप्बेल ने मनाया था। इसका मकसद समाज लेफ्ट हैंडेड व्यक्तियों की विशेषताओं को समझ सकें, उनकी स्वीकार्यता बढ़े एवं उनके प्रति पक्षपात कम हो सके। लेफ्ट हैंडर्स यानी वे लोग जो अपना हर काम बाएं हाथ से करते हैं। आमतौर पर ऐसे लोगों को कुछ असामान्य माना जाता है, लेकिन बाएं हाथ का अधिक उपयोग करने के पीछे वैज्ञानिक कारण होता है। प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में लगभग 10 प्रतिशत लोग लेफ्टी हैं। कई लोग इसे भाग्यशाली तो कुछ लोग इसे एक परेशानी बताते हैं।

कंगारू और तोता भी लैफ्टी
मनुष्यों के साथ साथ जानवरों में कंगारू एवं पक्षियों में तोता लैफ्टी होते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह बात साबित हुई है कि किसी का राइट या लेफ्ट हैंडर होना मां के गर्भ में ही निर्धारित हो जाता है। उसे अपने पैरंट्स से एक खास तरह का जीन विरासत में मिला होता है। इसे लेफ्ट हैंडर जीन कह सकते हैं। हालांकि इस जीन के पीछे क्या कारण हैं, इस पर अभी भी वैज्ञानिक शोध किया जा रहा है। लेफ्ट हैंडर्स व्यक्ति अपने दोनों हाथों का उपयोग अच्छी तरह से कर लेते हैं एवम वे एंबी डिस्ट्रूअस होते हैं। शोध के अनुसार लेफ्ट हैंडर्स व्यक्तियों में हर क्षेत्र में बेस्ट देने की क्षमता होती है। संगीत और कला के क्षेत्र में अपनी कल्पना शक्ति का अधिक उपयोग करते हैं। अक्सर लेफ्टी रचनात्मक विचार वाले होते हैं। स्पोर्ट्स में भी लेफ़्ट हैंडेड व्यक्तियों की बहुत रुचि होती है। ऐसे व्यक्ति किसी भी कार्य को परफेक्शन के साथ करने में विश्वास रखते हैं।
कई बीमारियों का खतरा भी अधिक
चिकित्सा जगत में प्रकाशित शोध के अनुसार लेफ्ट हैंडेड व्युक्तियों में कुछ रोगों का खतरा अधिक होता है। वर्ष 2007 में ब्रिटिश जर्नल ऑफ़ कैंसर में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार लेफ्ट हैंडेड महिलाओं में मेनोपॉज के बाद ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका अधिक होती है। अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी में की गई खोज के अनुसार लेफ़्ट हैंडेड व्यक्तियों में शिजोफ्रेनिया जैसे मानसिक रोग होने की संभावना अधिक होती है। लेफ़्ट हैंडेड व्यक्तियों को अनिद्रा होने की संभावना भी अधिक होती है।
शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के दबाव
लेफ्ट हैंडेड बच्चों को बचपन में अपने अनोखेपन के कारण लेफ्ट हैंड से काम करने वाले लोगों को नई-नई परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिससे उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के दबाव झेलने पड़ते हैं। कुछ देशों में अनेकों वर्ष पहले लेफ़्ट हैंडेड बच्चों को जबरन राइट हैंड से लिखने को बाध्य किया जाता था। यदि ऐसे बच्चे राइट हैंड से नही लिखते थे तो उनको हाथों पर बेंत मारने जैसी सजा भी दी जाती थी। स्कूल में डेस्क ही नहीं वरन् खेल के मैदान में भी लेफ्ट हैंडर्स को समस्या का सामना करना पड़ सकता है। लेफ्ट हैंड के बच्चों के खेलने के सामान कुछ मुश्किल से मिलते हैं, जिस कारण उनको राइट हैंड वाले खेलने के सामान का ही इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे उनको परेशानी होती है एवम् उनका परफॉर्मेंस भी प्रभावित होता है।समय के साथ अब जागरूकता बढ़ने से यह समस्याएं कम होती जा रही हैं एवं लेफ़्ट हैंडेड एथलीट अपने प्रतिद्वंदियों से खेल के मैदान में अच्छी तरह से मोर्चा लेते हुए सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं।
जागरूकता के अभाव में परेशानी
जन साधारण के बीच जागरूकता के अभाव में लेफ्ट हैंड से लिखने वाले बच्चों के लिए सबसे पहले और बड़ी परेशानी उनके घर में सामने आती है क्योंकि जागरूकता के अभाव में ऐसे परिवारों में माता.-पिता, दादा-दादी, अन्य रिश्तेदार आदि शुरुआत से ही लेफ्ट हैंड से लिखने या भोजन करने वाले बच्चों को जबरन दबाव बनाते हैं कि अपनी इस आदत को तुरंत बदलें । माता.पिता बच्चे को इस आदत से छुटकारा दिलाने के लिए टोकना, दण्डित करना एवम् अन्य प्रयास करते हैं। टीचर कई बार बच्चों को दांए से लिखने के लिए कहते हैं और कई बार देखा जाता है कि स्कूल में अन्य बच्चे लेफ्टी या खब्बू कहकर उनका मज़ाक उड़ाते हैं। हमारे समाज में भी कुछ ऐसे नियम हैं जो दाएं हाथ को प्रोत्साहित करते है जैसे भोजन करने या धार्मिक कार्यों में बांए हाथ से काम करना ग़लत माना जाता है।
जन्म के बाद अपना बायां अंगूठा चूसते हैं
लेफ्ट हेंडेड बच्चे जन्म के बाद अपना बायां अंगूठा चूसते हैं। बच्चे की शुरुआती उम्र से ही पता लग जाता है कि बच्चा किस हाथ से अपने काम और लिखने में आसानी महसूस करता है। इसलिए ये बहुत ही ज़रूरी है कि माता-पिता बच्चे पर दूसरे हाथ का इस्तेमाल करने का अनावश्यक दबाव नहीं डालें, बल्कि इस बात को स्वीकार करने की कोशिश करें कि बच्चे का वही तरीक़ा उसका कुदरती व्यवहार है। इसके अलावा लेफ्ट हैंडेड बच्चे को उसके कामों में मदद करें और प्रोत्साहित करें। बच्चे को यह ज़रूर बताएं कि हमारे समाज में ज़्यादातर लोग दाएं हाथ से काम करते हैं इसलिए उसे शुरुआत में थोड़ी परेशानी होगी। उसे इस अंतर के लिए मानसिक रूप से तैयार भी करें और प्रबल भी बनाएं। लेफ्ट हैंडेड बच्चों की बार-बार की रोका-टोकी मानसिक रुप से कमज़ोर बनाती है। मानसिक और शारीरिक दबावों के कारण बांए हाथ से काम करने वालों के मन में कई कुंठाएं बन जाती हैं जिसके कारण उनमें आत्मविश्वास की कमी, शर्मिला होना, लोगों से एडजस्ट न कर पाना, निर्णय लेने में जल्दी कंफ्यूज हो जाना और कभी-कभी ज्यादा ग़ुस्से आ जाने जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। अगर किसी के काम के हाथ के प्राकृतिक चयन पर ही आपत्ति उठाई जाती रहे, तो उसका मनोबल तो कमज़ोर होगा ही। जो स्वाभाविक है, उसे स्वीकार करें, यह लेफ्टीज़ की मदद होगी।
बचपन में किया परेशानियों का सामना
मैं भी बचपन शुरू से लेफ्टी था एवम् मुझे याद है कि बचपन में बाएं हाथ से खाने पर मेरी मां या अन्य रिश्तेदार मुझे बार-बार टोकते थे। लगातार टोकने के कारण मेरे मन में हीन भावना घर करने लगी थी एवं मैं अंतरमुखी होने लगा था। मुझे अच्छी तरह से याद है कि बचपन में मंदिरों में, धार्मिक कार्यक्रमों में मुझे अपने लेफ्ट हैंड को प्रसाद के लिए आगे बढ़ाते समय टोक दिया जाता था। सामाजिक कार्यक्रमों में कुछ लोग तो मेरे हाथ का परोसा खाना भी लेने से इंकार कर देते थे। नेत्र चिकित्सक के रुप में कार्य करते समय मुझे नेत्र ऑपरेशन सीखने में काफ़ी कठिनाई हुई लेकिन सौभाग्य से मुझे सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के लेफ़्ट हैंडेड नेत्र सर्जन डॉ ई जॉन मिलवर्टन से नेत्र सर्जरी सीखने का अवसर मिला। डॉ मिलवर्टन ने मुझे अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे लेफ्ट हैंडेड थे लेकिन ऑस्ट्रेलिया में टीचर्स ने उनको हाथों पर बेंत मारकर राइट हैंडेड व्यक्ति में बदलने की असफल कोशिश की थी। हम सभी समाज में लेफ्टीज के प्रति पक्षपात कम करते हुए समाज में जागरूकता बढ़ाते चलें। लेफ़्ट हैंडेड बच्चों को उनका बायां हाथ उपयोग करने से नहीं रोकें एवम् जाने अनजाने में उनको हतोत्साहित बिल्कुल नहीं करें।
















