किसान लगभग हर बाजी हारता है और फ़िर सर्वस्व जुटाकर, कर्ज़ लेकर करता है खेती…

फ़सल बीमा योजना एक ऐसा चारा लगा हुआ काँटा है जिसमें फ़ँसती तो किसान रूपी हर एक मछली है किन्तु उसका भला (खराबे की तुलना में) पूरा तो छोड़िये कई बार जानकारी और लालफ़ीताशाही के चलते क़तई नहीं हो पाता है...

kisan khet
गत दिनों की बरसात में खेत में भरा पानी

-वरदान सिंह हाडा-

vardaan singh hada
वरदान सिंह हाडा,
(संयोजक जागो किसान संगठन)

किसान से बड़ा अधिकृत सटोरिया कोई नहीं… जो लगभग हर बाजी हारता है और फ़िर सर्वस्व जुटाकर, कर्ज़ लेकर खेती करता है…
खेती संसार का सबसे बड़ा सट्टा ही तो है… बुवाई से लेकर मण्डी में बिकने को तैयार ढेर भी अचानक हुई बरसात से बह जाता है… और किसान हाथ मलता रह जाता है…

72 घण्टे की अनिवार्यता भी किसान के लिए एक उलझाने वाली शर्त है…हर किसान के पास न एन्ड्रॉयड फ़ोन है और न ही टोल फ़्री नम्बर पर बात करने की पारंगतता…
कल इन्हीं समस्याओं को लेकर हम” जागो किसान” के लोग कलेक्टर सा. को अपनी माँगें (जो कि मुख्यमन्त्री महोदय को सम्बोधित हैं) लिखित में ग्यापित करने पहुँचे…
हमें अति. जि. कलेक्टर सा. मिले, संयोगवश उस वक़्त वे कृषि विभाग और फ़सल बीमा से सम्बन्धित अधिकारियों की बैठक ले रहे थे…हमने अपनी बात भी उनसे कही जिसपर अधिकांश बिन्दुओं पर उन्होंने सहमति व्यक्त की…और हमारी माँग, ” कि ब्लॉक स्तरीय बीमा प्रतिनिधि के फ़ोन नम्बर हर ग्राम पंचायत के बाहर लिखे जाने चाहिए ” के आधार पर बीमा अधिकारी वैभव झा को तत्काल इस सम्बन्ध में आदेश जारी किया…
वहीं दूसरी ओर फ़ील्ड पोस्टिन्ग में महिला पटवारियों को नहीं लगाये जाने का अनुरोध किया (इसलिए किया कि वर्षा से बिगड़े रास्ते जिनपे पुरुषों को ही चलने में दिक्कत आती है वहाँ महिला पटवारी का जाना असम्भव है, वो नहीं जा पाती है जिससे खराबे की वास्तविक रिपोर्ट प्रभावित होकर रहती है) जिस पर अति. जि.कलेक्टर सा. ने कहा कि क्यों नहीं जायेगी… उसकी ड्यूटी है जाना चाहिए…जाना पड़ेगा…हालाँकि इस बात/आदेश के चरितार्थ होने में अभी भी पूर्णरूपेण सन्देह है…
तथा बागोद बांसखेड़ा रोड़ पर परम्परागत, प्राकृतिक बड़े नाले कर्श्या की पुलिया का मार्ग कुछ लोगों द्वारा पत्थर लगाकर अवरुद्ध कर दिया गया है जिसके कारण चमलासा, लायफ़ल, ब्राह्मखेडी आदि अनेक गाँवों की फ़सलें हर बार डूब जाती हैं…ऐसे अतिक्रमियों के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज़ किये जाकर जलावरोध को हटाने की मांग भी की गई…
देखते हैं अब आगे प्रशासनिक रुख क्या रहता है…?

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