भित्ति चित्रों की विरासत को संजोये है बड़े देवता जी की हवेली

इस हवेली के दो कक्षों में गुणीजनों के लिए इतना कीमती खजाना भरा है जिसका कोई मोल नहीं लगा सकता। यह खजाना है भित्ति चित्रों का

-ए एच जैदी-

ah zaidi
एएच जैदी

(नेचर प्रमोटर)
कोटा। कोचिंग सिटी कोटा के गढ़ पैलेस के पास चंबल किनारे एक पीले रंग की विशाल हवेली है। आम जन के लिए यह एक मात्र प्राचीन ऐतिहासिक हवेली हो सकती है लेकिन गुणी जनों के लिए यह विशाल इतिहास और परंपरा समेटे है जिसे एक प्रतिष्ठित परिवार पूरी शिद्दत से संजोये हुए है।

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यह हवेली बड़े देवता श्रीधर लाल जी की है। इसमें उनका परिवार निवास करता है। लेकिन इस हवेली के दो कक्षों में गुणीजनों के लिए इतना कीमती खजाना भरा है जिसका कोई मोल नहीं लगा सकता।

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बड़े देवता जी की हवेली

यह खजाना है भित्ति चित्रों का। हवेली के दोनों कक्षों में राधा कृष्ण, पनघट, शेषशायी विष्णु, श्रंगार, मदिरा पान करती नायिका, दीपावली पर फूल झड़िया चलाती दो नायिकाएं हैं। यहां श्रीकृष्ण की गोरधन पर्वत को अंगुली पर धारण करने और कृष्ण लीलाए के चित्र हैं तो ऊपर नावों में सवार राज दरबारियों के साथ चम्बल नदी में उत्सव का आयोजन जैसे चित्रों को भी देखा जा सकता है। दूसरे कक्ष में चूहे बिल्ली के खेल, राजाओं के फूल पत्तियों के कुछ स्केचिंग किये चित्र है। छत पर मानो चित्रों का कालीन बिछा दिया हो। बरामदों में भी कुछ चित्र बने हैं।

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भित्ति चित्र

ये निजी संपत्ति है इसलिए इन भित्ति चित्रों को देखने के लिए इजाजत की जरूरत होती है। लागभग 250 साल पुरानी इस हवेली को आज भी बड़े देवता जी के परिवार ने संभाल कर रखा है। इस हवेली के लिए टिपटा के पास सकरी गली में होकर जाना पड़ता है। मुख्य द्वार पर दो बैठने के गोखडे और छोटा दरवाजा हैं। इसके चारों ओर चित्र बने हैं। हवेली में अंदर खुला चौक है। जबकि तीसरी मंजिल पर चित्र वाले कक्ष है।

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श्रीराम पाण्डेय कोटा
श्रीराम पाण्डेय कोटा
3 years ago

बड़े देवता जी की हवेली के बेशकीमती भित्ति चित्रों को ,जनता के लिए खोलने की व्यवस्था होनी चाहिए . प्राचीन धरोहरों को डिबिया में बंद करके रखने से इनकी उपयोगिता में ग्रहण लगा रहता है .आज की पीढ़ी को अपने प्राचीन वैभवशाली विरासत को जानने, समझने का अवसर मिलना चाहिए.